Tuesday, July 17, 2018

Interviewed In Dainik Jagran Sakhi Magazine

There is nothing more beautiful than a warrior woman
standing in her power, courage, and confidence.
From this place of strength,
she is capable of loving the world in a way
that transforms pain into promise…
and hell into heaven.
~ Debbie Ford.


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H A P P I N E S S

What does it mean to you?

Sakhi, a women’s Hindi magazine by Dainik Jagran, recently ran a cover story in their magazine issue for the month of July titled 'Jee Le Zara' ('Live Your Life' in English) highlighting an important and primary responsibility we have towards ourselves, especially as women.

An ordinary woman, young or old, who is constantly dealing with the ever present politics inside apparently happy families, invariably dabbling in sorting out the mundane affairs of everyday life and handling the many responsibilities revolving around the interests and welfare of the entire family; what does happiness - her dreams, her wishes, her needs, her wants, HER own self - mean to her?

And, I couldn’t be more honored when the editor of the story, Vinita, reached out to me asking me about my dreams and the wishes I harbor in my heart. Now that the article is finally out, I am super thrilled to share this exciting news with all of you!

What I absolutely love about this piece is the balance with which it is written - how it does not shun the importance of a normal middle class family and the values like compassion, empathy and tenderness that it promotes but at the same time it also inspires every woman to have the heart and courage to take decisions and make choices in her life for her own happiness without feeling guilty about it.

You can see me (in one of my rare pictures on the blog) - here, I was featured alongside names like Madhuri Dixit, Apara Mehta, Vani Sood, Priya Bhargava, Dr. Varija and Madhu Sood. You may know some of these names while some of the others you might be hearing for the first time, but what is common to all of them is their resilience to tackle challenges head on, their strength to rise up above various odds and their attitude towards leading a good healthy life.


My Interview in Jagran Sakhi Magazine July Issue Cover Story on Dreams
Yours truly, talking about fulfilling dreams and happiness!

Special thanks also to the entire team of IndiBlogger for building such a powerful platform which celebrates the quirkiness and eccentricity of every individual as a whole, without any distinctions. To every single reader here, I am deeply grateful for all your well wishes and footprints with which you have graced My Yatra Diary... and me, throughout the years; where would I've been if not for your love and blessings? It's nothing but love alone that has been my strength and the fuel to my dreams.

Here's the unedited version of the interview I sent to the editor as my response to the questions asked. I hope you enjoy reading it. Just one thing, my responses are completely raw - so, I hope you'll excuse the mistakes I made while typing in Hindi.

1. आपके विचार से जीवन में सपनों का होना कितना जरूरी है ?

सपने क्या हैं? सपने माने वो एक कल्पना जहाँ हम अपने आप को बैठा देखना चाहते है पर वहा तक पहुंचने का रास्ता साफ़ दिखाई नहीं देता. कभी कभी हम मन ही मन मैं उस सपने को दबा लेते हैं यह सोचकर की शायद यह मुमकिन है ही नहीं. पर सपने कभी दबते नहीं. वह तो आसमान मैं आज़ाद पंछी की तरह होते है जो हमारी ज़िन्दगी को सदैव नयी उंचाइया छुने की प्रेरणा देते हैं. वह सपने ही हैं जो हमारी जीवन रूपी यात्रा को न केवल एक अर्थपुर्ण दिशा देते हैं पर उस दिशा पे दृढ़ता और सच्चाई से चलते रहने की शक्ति भी देते है.

2. आपकी विश लिस्‍ट में कौन सी बातें शामिल ?

यूँ तो अलग अलग समय पे विश लिस्ट मे काट शांट होती रहती है पर मेरी एक दिली तमन्ना यह है की में अपनी यात्राओं के द्वारा लाइफ के छुपे हुए ट्रेझस को खोज पाऊ. अपनी यात्राओं मे होने वाली अनुभूतिओं ko poore दिल से जीना चाहती हूँ , अपनी आँखों से बहार की दुनिया को देखना चाहती हु पर साथ ही साथ अपने अंदर जो एक हसीं दुनिया बसी हे, उसे भी discover करना चाहती हु, यही मेरी विश लिस्ट है. मेरी इस विशलिस्ट को पूरा करने का एक माध्यम मेरा ब्लॉग 'माय यात्रा डायरी' है जिसपे मै अपनी यात्राओं का वर्णन और उनसे जुड़े अपने विचार प्रकाशित करती हूँ.

3. आप अपने किसी ऐसे सपने के बारे में बताएं, जिसके सच होने पर आपको सबसे ज्‍यादा खुशी मिली हो ! 

मुझे बचपन से विदेश यात्रा करने का बहुत शौक था. मुझे याद है जब रात मे कोई टिमटिमाती बत्तीया आकाश मे दिखाई देती, मै उन्हें तब तक निहारती जब तक की वह आँखों से पूरी तरह ओझल न जाए. पापा से सवाल भी करती, पापा यह क्या है तो पता चला यह एयरोप्लेन है जो बहुत दूर 'विदेश' जा रहा है. जैसे ही कोई विमान को देखती, उसे अपनी नन्ही उंगलियों से बाय बाय करती। मुझे एक बार का वाक्या याद है जब मैंने पापा से पुछा था, की पापा हम विदेश कब जाएंगे, तब हमारी आर्थिक स्थिति शायद ऐसी नहीं रही होगी की हम इंटरनेशनल ट्रेवल कर पाते, तो उन्होने बड़े स्नेहपूर्वक मुझे यह जवाब दिया था, एक दिन ज़रूर जायेंगे। कई साल बीत गए, पढाई समाप्त करने के बाद ब्लॉग्गिंग शुरू की और इंडीब्लॉगर मे एक ट्रेवल राइटिंग कांटेस्ट में भाग लिया। कांटेस्ट में पूरी जी जान लगा के मेहनत की पर कभी सोचा नहीं था यह कांटेस्ट में जीत पाऊँगी। भगवन की कृपा, पाठको के सहयोग और दुआओ से कांटेस्ट जीता, पहली विदेश यात्रा करने का अवसर मिला, जापान में रोचक अनुभव प्राप्त हुए, और पापा के साथ देखा एक बेहद अनमोल सपना पूरा हुआ. अभी भी जब में उन् दिनों को याद करती हूँ ya phir इस एपिसोड को narrate करती हूँ, मेरा ह्रदय ख़ुशी से फुला नहीं समाता. एक साल बाद दूसरा ट्रेवल राइटिंग कांटेस्ट भी जीत haasil hui जिसमे मेलबोर्न की सेर करने का अवसर मिला, यह दोनों ही ज़िन्दगी के ऐसे पड़ाव है जो आज किसी सपने से कम नही लगत है.

4. किन कार्यों से आपको सबसे ज्‍यादा खुशी मिलती हे और क्‍यों ? 

कोई भी कार्य जो मुझे प्रकृति के करीब ले कर जाए, वह मुझे बेहद पसंद है. नयी जगहों को देखना, अनुभव करना, उनके बारे मे लिखना दिल के बहुत ही करीब है. यूँ तो ट्रेवल ब्लॉग्गिंग मेरा काम भी है पर में अपने ब्लॉग को सिर्फ मेरा करियर मात्र नहीं समझती ...  मेरे शब्द मेरी पूजा भी है, और मेरी सखी भी. इन् आठ सालो मे ब्लॉग्गिंग के माध्यम से न केवल बाहरी पर अंदर की दुनिया के हसीन रंगो को भी बटोरा है.

5. क्‍या आपको ऐसा लगता है कि भारतीय महिलाएं अपनी खुशियों के बारे में ज्‍यादा नहीं सोच पातीं, उनकी दुनिया केवल पति और बच्‍चों तक ही सीमित रहती है। 

यह बात काफी हद तक सच है, काफी बार महिलाये अपने लाइफ के रोल्स प्ले करने में इतनी उलझ जाती है की स्वयं पर टाइम और ध्यान नहीं दे पाती. पर समय बदल रहा है, अवेयरनेस बढ़ रही है और धीरे धीरे यह मालूम चल रहा है की हमारी भी एक अपनी पहचान है, शादी से परे, दुनिया के रिश्तो से परे, एक जीव के रूप में, परम परमात्मा पिता के संतान के रूप में . . और हमारी ख़ुशी, हमारे भाव  हमारे अंदर है न की किसी पर निर्भर है, हमारी खुश अवस्था ki जिम्मेदारी स्वयं हम पर है. 

6. चूकि आप टैवलर और ब्‍लॉगर है तो इसके लिए आपका ज्‍यादातर समय घर से बाहर व्‍यतीत होता होगा। आपके परिवार की जिम्‍मेदारियों ओर यात्राओं के बीच तालमेल क्‍ेसे बिठाती हैं ? परिवार में कौन लोग हैं?  आपकी अति व्‍यस्‍त रूटीन को लेकर परिवार के किसी सदस्‍य ने कभी कोई आपत्ति तो जाहिर नहीं की ? 

मेरी यात्राऐं continuous  नही होती है, में स्लो ट्रैवलर हु, अपने pace पे यात्राए करना पसंद करती हूँ.जैसे मान लीजिये अभी मैं एक हफ्ते के लिए बाहर रही तोह अगले दो महीने तक घर पर समय व्यतीत कर सकती हूँ. उस दौरान ब्लोग संभालती हूँ और घर में मम्मी का हाथ भी बटाने की कोशिश करती हू. यह सच है की माय यात्रा डायरी मेरी ज़िन्दगी का एक एहम हिस्सा है और हमेशा रहेगा पर घर और फॅमिली की ज़िम्मेदारिया भी मेरे लिए उतनी ही महत्त्वपूर्ण है और दोनों ही जगह हमेशा बेस्ट देने की कोशिश करती हू, यही मैंने अपनी मम्मी से सीखा है. पापा को हमेशा मेरे ब्लॉग पे गर्व रहा है और भगवन की असीम अनुकम्पा से भाई के रूप में एक दोस्त मिला है जिसने अपने सहयोग से हमेशा मेरे सपनो को उड़ान देने की कोशिश ही की है.

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If you wish to read the complete story, there's an e-version of the print issue of the magazine which you can find here - http://sakhi.epapr.in/1714854/Sakhi/July-2018#dual/20/1